बोर्ड ऑफ पीस में यूं ही मुंह उठाकर पहुंच गया पाकिस्तान? सदस्य देशों ने सहयोग के लिए कुछ ना कुछ तो दिया, इन्होंने क्या दिया?

 

बोर्ड ऑफ पीस में यूं ही मुंह उठाकर पहुंच गया पाकिस्तान? सदस्य देशों ने सहयोग के लिए कुछ ना कुछ तो दिया, इन्होंने क्या दिया?




पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में हिस्सा लिया। इस मंच पर पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती हुई है। बेइज्जती से इतर चलिए आपको बताते हैं कि पाकिस्तान यहां क्या लेकर पहुंचा था।

Pakistan Agenda Less In Board Of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी है। यहां पीएम शहबाज शरीफ की बेइज्जती का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। सवाल कई है जैसे पाकिस्तान का इस बोर्ड में क्या योगदान है, पाकिस्तान का क्या प्लान है, पाकिस्तान ने जो कमिटमेंट किए हैं वो पूरे करेगा या नहीं। फिलहाल, इन सवालों का जो जवाब मिला है उससे तो यही नजर आता है पाकिस्तान के पास ना तो ठोस कोई एजेंडा है और ना ही कोई विजन। काम बस ट्रंप की जी हुजूरी कर अपना उल्लू सीधा करना है।  

बोर्ड ऑफ पीस में दिखी पाकिस्तान की हैसियत

पाकिस्तान की हैसियत दुनिया में क्या है यह बोर्ड ऑफ पीस के मंच पर यह साफ नजर आया। सियासी गलियारों में चर्चा है कि पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम वहां खुद को बेहद असहज और अलग-थलग महसूस कर रहे थे। दुनिया के बडे़ लीडर्स उन्हें भाव तक नहीं दे रहे थे। ग्रुप फोटो के दौरान शहबाज शरीफ को बीच की जगह नहीं मिली। इसमें डोनाल्ड ट्रंप के ठीक पीछे सऊदी अरब, इंडोनेशिया और कतर जैसे देशों के नेता खड़े थे वहीं शरीफ भीड़ में एक तरफ कोना पकड़े नजर आए। अब ऐसा क्यों हुआ यह भी आपको समझाते हैं।


Board of Peace Group Pic
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खाली हैं पाकिस्तान के हाथ

दरअसल,  बोर्ड ऑफ पीस चाहता है कि सदस्य देश गाजा में शांति सेना के लिए अपने जवान भेजे और आर्थिक सहयोग भी करें। इंडोनेशिया समेत तमाम देशों ने तो इसे लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। लेकिन, पाकिस्तान वादा करने के बाद अब पीछे हटता हुआ नजर आ रहा है। मतलब साफ है कि शरीफ का मुल्क ना तो डॉलर दे सकता है और ना ही सेना भेजना चाहता है। तो पाकिस्तान का जो हाथ सेना के बल पर भरा हुआ नजर आ रहा था यहां आकर खाली दिखा। कहा जा है कि पाकिस्तान के इसी दोगलेपन की वजह से अमेरिका में शरीफ को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। 

सिर्फ औपचारिक मौजूदगी

वैसे देखा जाए तो गरीबी, महंगाई, आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में सिर्फ अपनी औपचारिक मौजूदगी ही दर्ज कराई है। देना तो कुछ है नहीं, हो सकता है कि मौके का फायदा उठाते हुए किसी मुल्क से कुछ मांग लिया हो। हो सकता है शरीफ साहब इसी मकसद से अमेरिका गए हों। पाकिस्तान के बेइज्जती शब्द सबसे उपयुक्त है जो उसे शायद ही कभी महसूस होती है।  हालांकि, शहबाज शरीफ को तब राहत जरूर मिली होगी जब ट्रंप ने उनकी तरफ इशारा करते हुए कहा कि ‘I like this guy’

बोर्ड ऑफ पीस में किन देशों का क्या है योगदान?

  • बोर्ड ऑफ पीस में अमेरिका ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर देने का वादा किया है। 
  • कई मुस्लिम बहुल देशों ने भी गाजा के लिए आर्थिक मदद और सैनिक मुहैया कराने की पेशकश की है। 
  • कतर, सऊदी अरब और यूएई प्रत्येक ने कम से कम 1-1 अरब डॉलर का वादा किया है। 
  • फीफा (FIFA): गाजा में फुटबॉल से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 7.5 करोड़ डॉलर।
  • संयुक्त राष्ट्र (UN): मानवीय सहायता के लिए 2 अरब डॉलर।
  • सैनिक भेजने वाले देश: मोरक्को, अल्बानिया, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान और कोसोवो।
  • इंडोनेशिया की बड़ी भूमिका: दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने 8000 सैनिक भेजने की घोषणा की है। 
  • इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) को कुल 20,000 सैनिकों की आवश्यकता है। 
  • ISF के अमेरिकी कमांडर मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स होंगे और उनका डिप्टी एक इंडोनेशियाई अधिकारी होगा।
  • सैनिक भेजने वाले देशों में पाकिस्तान का नाम नहीं है।

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