Explainer: ईरान से 400 किलो यूरेनियम निकालना चाहते हैं ट्रंप, जानिए कितना मुश्किल है ये काम?

 

Explainer: ईरान से 400 किलो यूरेनियम निकालना चाहते हैं ट्रंप, जानिए कितना मुश्किल है ये काम?


Edited by : Pratik Sahu



अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग की सबसे बड़ी वजहों सें एक है ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम। ईरान के पास भारी मात्रा में एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए परेशानी का सबब है।


वॉशिंगटन: अमेरिका की ओर से ईरान में जमीनी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस तरह के ऑपरेशन पर विचार कर रहे हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है कि ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई की जरूरत क्या है? तो इस सवाल का जवाब यह है कि अमेरिका ईरान के पास से लगभग 400 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम को निकालना चाहता है जिसका इस्तेमाल तेहरान परमाणु हथियार बनाने के लिए कर सकता है। 

ट्रंप का सख्त रुख

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी नेता की सोच से परिचित एक सूत्र के हवाले से बताया कि ट्रंप ने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि वो तेहरान पर दबाव डालें कि वह जंग खत्म करने की शर्त के तौर पर इस सामग्री को सौंपने पर सहमत हो जाए। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अमेरिकी राजनीतिक सहयोगियों को साफ तौर पर संकेत दिया है कि तेहरान इस परमाणु सामग्री को अपने पास नहीं रख सकता। उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की है कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर इसे नहीं सौंपता है, तो इसे जबरदस्ती कब्जे में ले लिया जाए। चलिए ऐसे में यह जानते हैं कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की जमीनी कार्रवाई आसान क्यों नहीं रहने वाली है।

ट्रंप का बदलता रुख

ईरान के खिलाफ जब से अमेरिका की जंग छिड़ी है तब से ट्रंप ने इसके अलग-अलग कारण बताए हैं। लेकिन, ट्रंप इस बात पर लगातार कायम रहे हैं कि इजरायल के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई में शामिल होने का उनका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार ना हों। हालांकि, अब वह समय है जब ट्रंप को तय करना है कि वो अपने वादे को पूरा करने के लिए किस हद तक जाने को तैयार हैं। जिसमें ईरान के पास मौजूद परमाणु सामग्री को कब्जे में लेना या नष्ट करना भी शामिल है।

ईरान में US मरीन और ट्रंप का बयान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पेंटागन खाड़ी क्षेत्र में 10 हजार अतिरिक्त जमानी सैनिक तैनात करने की योजना बना रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पिछले हफ्ते कहा था कि 3,500 से ज्यादा सैनिक जिनमें 2,500 मरीन शामिल हैं मध्य पूर्व पहुंच चुके हैं। इसके बाद ट्रंप ने कहा कि ईरान को वही करना होगा जिसकी अमेरिका मांग कर रहा है, वरना उनके पास कोई देश ही नहीं बचेगा। इतना ही ईरान के यूरेनियम का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा वो हमें एनरिच्ड यूरेनियम सौंप दें।


क्या है ट्रंप की योजना?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और उनके कुछ सहयोगियों ने दावा किया है कि एक टारगेटेड ऑपरेशन के जरिए ईरान के परमाणु मटीरियल को जब्त करना संभव होगा। इस ऑपरेशन से जंग की समय-सीमा में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी और अमेरिका अप्रैल के मध्य तक इस संघर्ष को खत्म करने में सक्षम हो जाएगा। अमेरिकी कमांडरों का भी यही कहना है कि वो लंबा चलने वाला युद्ध नहीं चाहते हैं।

ट्रंप की योजना और जोखिम

ईरान के यूरेनियम को जब्त करना अमेरिका के लिए आसान नहीं होने वाला है। यह बेहद जटिल और जोखिम भरा सैन्य ऑपरेशन साबित हो सकता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अपने इस मिशन को पूरा करने के लिए अमेरिका को ईरान की जमीन पर सेना उतारनी ही पड़ेगी। ऐसे में यह ट्रंप के लिए सियासी लिहाज से भी बेहद संवेदनशील हो जाता है क्यों कि उन्होंने इस बात का भरोसा दिया है कि वो अमेरिका को मध्य पूर्व के किसी भी लंबे और खूनी संघर्ष में नहीं फंसाएंगे।

क्यों आसान नहीं होगा ऑपरेशन?

अमेरिका की अंदरूनी सियासत से इतर ईरान से यूरेनियम जब्त करने का कोई भी कदम जटिल और खतरनाक साबित हो सकता है। ईरान भी पलटवार करेगा और जंग कई और दिनों तक जारी रह सकती है। ऐसे किसी भी ऑपरेशन के लिए अमेरिकी सेना को ईरानी ठिकानों में घुसना होगा और यह बिलकुल भी आसान नहीं होने वाला है। अमेरिकी सैनिक ईरान में दाखिल भी हो गए तो पहले उन्हें उस जगह को महफूज करना होगा जहां यूरेनियम होगा। ईरान ने भी ऐसी जगह पर पहले ही माइन्स बिछाई होंगी और दुश्मनों को जवाब देने की योजना तैयार होगी। ऐसे में अमेरिका को भी तैयार रहना होगा कि वो कैजुअल्टी सहने के लिए तैयार रहे।

आसान नहीं होगा निकलना

मान लिया जाए कि अमेरिका को ईरान की परमाणु सामग्री मिल भी गई तो उसका वहां से सुरक्षित निकलना भी आसान नहीं होगा। अमेरिकी टीमों को वहां से निकालने के लिए एक खास ऑपरेशन टीम की जरूरत पड़ेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम 40 से 50 विशेष सिलेंडरों में रखा है जो देखने में स्कूबा टैंक जैसे लगते हैं। इन सिलेंडरों को ले जाने के लिए खास सेफ्टी की जरूरत होगी। कई ट्रक लगेंगे और एक पूरा सिस्टम ही बनाना पड़ेगा। इसके अलावा यूरेनियम को ईरान से बाहर ले जाने के लिए हवाई अड्डे की जरूरत होगी। तो यह कुछ घंटों का नहीं बल्कि कई दिनों का काम है। दुश्मन मुल्क में कई दिन बिताना जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।


अमेरिका और इजरायल ने किया था हमला

इस बीच यहां यह भी बता दें कि, साल 2025 के जून महीने में भी इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। ये हवाई हवाई हमले ईरान के परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाकर किए गए थे। तब कहा गया था था कि ईरान के पास 400 किलोग्राम से अधिक 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड यूरेनियम और लगभग 200 किलोग्राम 20 प्रतिशत फिसाइल मटीरियल है, जिसे आसानी से 90 प्रतिशत वेपन ग्रेड यूरेनियम में बदला जा सकता है।

IAEA ने क्या कहा?

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के डायरेक्टर राफेल ग्रॉसी के अनुसार, ईरान का परमाणु मटीरियल मुख्य रूप से उन तीन जगहों में से दो पर जमा है जिन पर अमेरिका ने हमला किया था। ये जगहें हैं इस्फहान परमाणु कॉम्प्लेक्स में एक भूमिगत सुरंग और नतांज में एक भंडार। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरानियों के पास यूरेनियम को एनरिच करने के लिए सेंट्रीफ्यूज हैं और एक नई भूमिगत एनरिचमेंट साइट स्थापित करने की क्षमता भी है।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

US: Another Afghan national arrested in Texas over TikTok 'bomb-making' video

जम्मू-कश्मीर: किशोर सुधार गृह से फरार हुए 2 पाकिस्तानी नागरिकों को पुलिस ने पंजाब से दबोचा, पुलिसकर्मियों को घायल करके भागे थे

राज्यसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश और कर्नाटक से बीजेपी उम्मीदवारों का ऐलान, विधान परिषद के लिए भी दो नाम दिए