कारगिल युद्ध के हीरो कर्नल सोनम वांगचुक का निधन, रक्षा मंत्री और सेना ने दी श्रद्धांजलि

 

कारगिल युद्ध के हीरो कर्नल सोनम वांगचुक का निधन, रक्षा मंत्री और सेना ने दी श्रद्धांजलि


Edited by : Pratik Sahu


कारगिल युद्ध के हीरो और महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल सोनम वांगचुक का शुक्रवार को निधन हो गया। ऑपरेशन विजय में उनके साहस और नेतृत्व ने दुश्मन पर निर्णायक बढ़त दिलाई थी।


नई दिल्ली: कारगिल युद्ध के हीरो और महावीर चक्र से सम्मानित सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कर्नल सोनम वांगचुक का शुक्रवार को निधन हो गया। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय सेना ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। बता दें कि कर्नल वांगचुक ने कारगिल युद्ध के दौरान बेहद विषम परिस्थितियों में अपनी टीम को संभाला था और दुश्मन पर जवाबी हमला करके उसके सैनिकों को मार गिराया था।

'एक साहसी और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक थे कर्नल वांगचुक'

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कर्नल वांगचुक को एक साहसी और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक बताया। उन्होंने कहा कि वे लद्दाख का गौरव थे और उन्होंने हमेशा देश की सेवा को प्राथमिकता दी। सिंह ने कहा कि ऑपरेशन विजय के दौरान दुर्गम ऊंचाई वाले इलाकों में उनका नेतृत्व और साहस सैनिकों के लिए प्रेरणा बना।



'उनका जीवन साहस, सेवा और एकता का प्रतीक था'

भारतीय सेना ने भी कर्नल वांगचुक के निधन पर गहरा दुख जताया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। सेना ने उन्हें एक बहादुर सैनिक, समर्पित नेता और लद्दाख का सच्चा बेटा बताया, जिनका जीवन साहस, सेवा और एकता का प्रतीक था। सेना ने उनके वीरता पुरस्कार के संदर्भ में बताया कि 30 मई 1999 को, उस समय मेजर रहे सोनम वांगचुक ऑपरेशन विजय के दौरान बाटालिक सेक्टर में एक सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। उनकी टीम को 5,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक महत्वपूर्ण रिज लाइन पर कब्जा करने का जिम्मा दिया गया था, ताकि दुश्मन उसे इस्तेमाल न कर सके।



विषम परिस्थितियों में दुश्मन के छुड़ा दिए थे छक्के

इस दौरान दुश्मन ने अचानक हमला कर दिया, जिसमें लद्दाख स्काउट्स के एक जवान की मौत हो गई। कठिन परिस्थिति में भी मेजर वांगचुक ने अपनी टीम को संभाला और बहादुरी दिखाते हुए जवाबी हमला किया। उन्होंने दुश्मन के ठिकाने पर हमला कर दुश्मन देश के 2 सैनिकों को मार गिराया और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। उनकी इस अदम्य वीरता के लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है।


जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी कर्नल वांगचुक को दी श्रद्धांजलि

लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि कर्नल वांगचुक का साहस, नेतृत्व और देशभक्ति हमेशा याद रखी जाएगी। उनका योगदान कठिनतम परिस्थितियों में देश की जीत में बेहद महत्वपूर्ण रहा। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और सभी सैन्य अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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