पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का फाइनल रिजल्ट, BJP और TMC को कितनी सीटें मिलीं, 2021 से कितने अलग नतीजे?
Edited by : Pratik Sahu
BJP ने इस चुनाव में कुल 208 सीटें जीती हैं, लेकिन 2021 में TMC को इससे भी ज्यादा सीटें मिली थीं। हालांकि, भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने से आने वाले पांच सालों में राज्य में कई तरह के बदलाव होंगे।
बंगाल में कांग्रेस ने दो सीटें जीती हैं और हुमायूं कबीर भी दो सीटों पर जीते हैं। सीपीआईएम और एआईएसएफ के खाते में एक-एक सीटें गई हैं। हुमायूं कबीर और शुभेंदु अधिकारी दो-दो सीट पर जीते थे। हुमायूं कबीर ने रेजीनगर विधानसभा सीट और शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया है। ऐसे में इन दोनों सीटों पर छह महीने के अंदर उपचुनाव होंगे। इस दौरान बीजेपी दोनों सीटें जीतकर अपने विधायकों की संख्या 209 तक ले जा सकती है। इसके बावजूद वह टीएमसी के 2021 वाले प्रदर्शन से पीछे रहेगी।
2021 विधानसभा चुनाव के नतीजे
2021 विधानसभा चुनाव में भी टीएमसी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर रही थी। दोनों पार्टियों के वोट शेयर में इतना ज्यादा अंतर नहीं था, जो सीटों पर दिख रहा था। इस चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थीं। वहीं, बीजेपी सिर्फ 77 सीटें जीत पाई थी। दो सीटें अन्य के खाते में गई थीं। हालांकि, यह पहला मौका था, जब बीजेपी यहां मुख्य विपक्षी पार्टी बनी। इस वजह से इस हार ने भी बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए टॉनिक का काम किया। नतीजा अगले चुनाव में दिखा, जब पार्टी के सबसे बड़े चेहरे शुभेंदु ने ममता को उनकी पसंदीदा सीट पर दोबारा चुनौती दी और दोबारा चुनाव जीतने में सफल रहे। बीजेपी भी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई।
क्या ममता के लिए वापसी संभव?
बीजेपी ने बेशक बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन टीएमसी के 2021 के प्रदर्शन की बराबरी नहीं कर पाई। ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर टीएमसी भी बीजेपी की तरह मेहनत करती है तो अगले चुनाव में दमदार वापसी कर सकती है, लेकिन बीजेपी का इतिहास और बंगाल का पैटर्न इसकी गवाही नहीं देते। बंगाल में 2006 तक लेफ्ट का दबदबा था। सीपीआईएम लगातार चुनाव जीत रही थी। 2011 में ममता ने लेफ्ट को सत्ता से बाहर किया और 2021 तक यह पार्टी विपक्ष से भी गायब हो गई। अब 2026 में बीजेपी ने टीएमसी को सत्ता से बाहर किया है। ऐसे में टीएमसी अगले चुनाव में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी खो दे तो हैरानी नहीं होगी।
क्या है बीजेपी का इतिहास?
भारतीय जनता पार्टी का इतिहास रहा है कि एक बार सत्ता में आने के बाद इस पार्टी को हराना कभी भी आसान नहीं रहा है। यूपी से लेकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर-पूर्व के कई राज्यों में बीजेपी ने एक बार जीत हासिल करने के बाद सत्ता अपने पास बरकरार रखी है। एक-दो अपवादों को छोड़कर अगर विपक्षी दल जीते भी तो उनकी जीत का अंतर कम था और लंबे समय तक सत्ता में नहीं रह पाए। मध्य प्रदेश में कमलनाथ और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। खास बात यह है कि गुजरात को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में बीजेपी का दबदबा 2000 के बाद कायम हुआ है और इन राज्यों में अब पार्टी की जड़ें बेहद मजबूत हो चुकी हैं। उत्तर पूर्व के अधिकतर राज्यों में पिछले 10-15 साल में ऐसा हुआ है। इस लिहाज से यह कहा जा सकता है कि अगले तीन चुनाव तक बीजेपी को हराना तो दूर कमजोर करना भी मुश्किल होगा।
