NCERT चैप्टर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने वापस लिया आदेश, सभी तीन शिक्षाविदों को दी राहत
Edited by : Pratik Sahu
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी के विवादित चैप्टर मामले में अपना पुराना आदेश वापस ले लिया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकारें इन शिक्षाविदों को किसी भी शैक्षणिक कार्य में शामिल करने के संबंध में स्वयं के निर्णय ले सकती हैं।
चैप्टर तैयार करने में नहीं थी दुर्भावना
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में कहा था कि इन शिक्षाविदों ने जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया और कक्षा 8 के छात्रों के सामने भारतीय न्यायपालिका की नकारात्मक छवि दिखाने की कोशिश की। अब कोर्ट ने यह टिप्पणी भी हटा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि अध्याय तैयार करने में किसी तरह की दुर्भावना नहीं थी और यह सामूहिक फैसले के बाद तैयार किया गया था। कोर्ट ने साफ किया कि केंद्र और राज्य सरकारें इन शिक्षाविदों को किसी अकादमिक काम से जोड़ने पर अपना अलग फैसला ले सकती हैं।
सुनवाई के दौरान वकीलों ने क्या कहा
सीनियर वकील श्याम दीवान ने कोर्ट से कहा कि मार्च का आदेश बिना शिक्षाविदों को सुने पास किया गया था। उन्होंने बताया कि यह किसी एक व्यक्ति की लिखी सामग्री नहीं थी, बल्कि सामूहिक रूप से तैयार की गई थी। वहीं, सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि न्यायपालिका पर यह चैप्टर कक्षा 6 और 7 की पढ़ाई का हिस्सा आगे बढ़ाने के लिए था। उन्होंने दलील दी कि जब मीडिया में न्यायपालिका से जुड़े मुद्दों पर खुली चर्चा होती है, तो छात्रों को भी व्यवस्था की सही तस्वीर समझनी चाहिए।
सकारात्मक भूमिका का नहीं था जिक्र
इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि समस्या यह थी कि किताब में भ्रष्टाचार को केवल न्यायपालिका की खास समस्या की तरह दिखाया गया। उन्होंने कहा कि किताब में कानूनी सहायता और न्यायपालिका की सकारात्मक भूमिका का जिक्र नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि किताब की सामग्री अनुचित और गैरजरूरी थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पहले ही एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी बना चुकी है, जो इस सामग्री की समीक्षा करेगी।
