तेलंगाना में आधी रात आया भूकंप, भद्राद्री कोठागुडेम में हिली धरती, 10 किमी नीचे था केंद्र
Edited by : Pratik Sahu

भूकंप की तीव्रता 3.8 मैग्नीट्यूड थी। इस वजह से कोई खास नुकसान नहीं हुआ। रात के समय अधिकतर लोग सो रहे थे। ऐसे में भूकंप का पता भी नहीं चला। हालांकि, तीव्रता ज्यादा होने पर भारी नुकसान हो सकता था।
किस तीव्रता के भूकंप मचाते हैं तबाही
भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल या आधुनिक मॉमेंट मैग्नीट्यूड स्केल पर मापी जाती है। यह लॉगरिदमिक स्केल है। हर 1 पॉइंट बढ़ने पर कंपन की ताकत 10 गुना और ऊर्जा लगभग 31-32 गुना बढ़ जाती है। 3.8 तीव्रता का भूकंप सुरक्षित श्रेणी में आता है। ज्यादातर लोग इसे महसूस कर सकते हैं, लेकिन इमारतें टूटने या बड़े नुकसान की संभावना न के बराबर होती है।
3.0 से कम: बहुत हल्का, ज्यादातर महसूस नहीं होता।
3.0–3.9: हल्का — अक्सर महसूस होता है, लेकिन नुकसान बहुत कम या न के बराबर।
4.0–4.9: हल्का से मध्यम — कुछ कमजोर इमारतों में दरारें आ सकती हैं।
5.0–5.9: मध्यम — अच्छी इमारतों में मामूली नुकसान, कमजोर इमारतों को काफी नुकसान।
6.0–6.9: मजबूत — बड़े क्षेत्र में नुकसान, सैकड़ों किलोमीटर तक असर।
7.0–7.9: बड़ा भूकंप — गंभीर नुकसान, हजारों मौतें हो सकती हैं।
8.0 या उससे ज्यादा: बहुत बड़ा भूकंप — तबाही, लाखों प्रभावित, सुनामी का खतरा।
भूकंप क्यों आते हैं?
पृथ्वी की ऊपरी परत कई टेक्टॉनिक प्लेट्स में बंटी हुई है। ये प्लेट्स हर साल कुछ सेंटीमीटर की रफ्तार से घूमती रहती हैं। जब ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं, रगड़ती हैं या अलग होती हैं, तो उनके बीच तनाव जमा होता है। जब यह तनाव बहुत ज्यादा हो जाता है, तो प्लेट्स अचानक खिसक जाती हैं। इस खिसकाव से निकलने वाली ऊर्जा भूकंपी तरंगों के रूप में बाहर आती है, जो हमें भूकंप के रूप में महसूस होती है। भारत मुख्य रूप से इंडियन प्लेट पर है, जो यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इसी वजह से हिमालय बन रहे हैं। तेलंगाना जैसे क्षेत्र में भूकंप कम आते हैं, लेकिन कभी-कभी छोटे-मोटे झटके आ सकते हैं।