कानपुर में 225 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़, 6 आरोपी गिरफ्तार, 450 म्यूल अकाउंट के जरिए 2500 लोगों को बनाया शिकार

 Edited by : Pratik Sahu

Kanpur- India TV Hindi

कानपुर में 225 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़


कानपुर में 225 करोड़ की साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, 2500 लोगों को शिकार बनाया गया।


कानपुर: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की साइबर क्राइम सेल और शिवराजपुर थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए देशभर में फैले एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का सफल खुलासा किया है। इस दौरान पुलिस ने गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो ग्रामीणों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों के जरिए करीब 225 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन होने की जानकारी सामने आई है।

क्या है पूरा मामला?

मामले में डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से लगभग 450 म्यूल अकाउंट की जानकारी मिली है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल देशभर में डिजिटल अरेस्ट, फर्जी जांच एजेंसियों और अन्य साइबर ठगी के मामलों में किया जा रहा था। अनुमान है कि गिरोह अब तक करीब 2000 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का झांसा देकर खुलवाए खाते

इस मामले में कानपुर पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपी शिवराजपुर क्षेत्र के कुकरी, भैसऊ और आसपास के गांवों के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर खातों का संचालन स्वयं करते थे। खाताधारकों को बदले में हर महीने 5 से 10 हजार रुपये तक दिए जाते थे।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए छिपाई जाती थी ठगी की रकम

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गिरोह साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को पहले विभिन्न खातों में मंगवाता था। इसके बाद उस रकम को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कराया जाता था। टेलीग्राम ग्रुप्स के माध्यम से पर्सन-टू-पर्सन ट्रेडिंग कर रकम को दोबारा भारतीय मुद्रा में बदलकर अलग-अलग खातों में भेजा जाता था, जिससे जांच एजेंसियों के लिए मनी ट्रेल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।

NCRB पोर्टल पर मिलीं ऐसी कई शिकायतें

पुलिस के अनुसार, आरोपियों से जुड़े 25 बैंक खातों की जांच में NCRB पोर्टल पर 27 शिकायतें दर्ज मिलीं। इनमें एक जनसेवा केंद्र के खाते में करीब 10 करोड़ रुपये के लेनदेन का रिकॉर्ड सामने आया है। केवल इसी खाते से संबंधित 15 शिकायतें दर्ज पाई गई हैं।

हाईस्कूल पास निकला मास्टरमाइंड

मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन और कमल के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना अशरफ खान हाईस्कूल तक पढ़ा है, जबकि अन्य आरोपी इंटरमीडिएट और स्नातक शिक्षित हैं। जांच में यह भी सामने आया कि राजन और सूरज नए सदस्यों को साइबर ठगी की ट्रेनिंग देते थे।

देशभर से आई थीं शिकायतें

इन खातों से जुड़े मामलों की शिकायतें दिल्ली, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से प्राप्त हुई हैं। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था।

बरामद हुआ इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग सामान

इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 मोबाइल फोन, 1 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 2 चेकबुक और 12 डेबिट कार्ड बरामद किए हैं। साथ ही बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा में खुलवाए गए खातों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल इस मामले में पुलिस के खुलासे ने कहीं न कहीं एक बड़े अपराध पर प्रहार किया है । 

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