पद्म भूषण से सम्मानित संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप का निधन, संसद से 37 साल तक जुड़े रहे
Edited by : Pratik Sahu
पद्म भूषण डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी उनके निधन पर दुख जताया-
37 साल तक संसद से जुड़े रहे
डॉ. सुभाष कश्यप का जन्म 10 मई 1929 को हुआ था। डॉ. कश्यप का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार में हुआ था। किशोरावस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हो गए थे। उन्होंने साल 1953 में संसद सचिवालय से अपने करियर की शुरुआत की थी और करीब 37 सालों तक संसद से जुड़े रहे। वह 1984 से 1990 तक देश की 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव रहे। उन्होंने जिनेवा में 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन' (IPU) का नेतृत्व भी किया था।
डॉ. कश्यप भारत सरकार के लिए पंचायती राज कानूनों के सलाहकार रहे। इसके अलावा, जब देश के संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए एक राष्ट्रीय आयोग बनाया गया था, तो वह उसके सदस्य और ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष भी थे। वह लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन (INBA) के अध्यक्ष भी रहे।
2015 में मिला था 'पद्म भूषण'
देश और समाज के लिए किए गए उनके शानदार कामों को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2015 में उन्हें देश के बड़े सम्मानों में से एक 'पद्म भूषण' से नवाजा था। उनकी लिखी किताबें आज भी छात्रों और कानून के जानकारों के लिए एक गाइड की तरह हैं।
