तिरुपति बालाजी मंदिर में हर दिन आता है करोड़ों का चढ़ावा, कैसे होती है इसकी गिनती? जानें कितने लेयर की होती है सिक्योरिटी
Edited by : Pratik Sahu

आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में हर दिन करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। यहां आने वाले चढ़ावे की गिनती के लिए चुने गए लोगों की बहुत ही गहन जांच की जाती है। आइये जानते हैं कि यहां आने वाले चढ़ावे की गिनती कैसे होती है।
सिर्फ धोती पहनते हैं गिनती करने वाले लोग
TTD की विजिलेंस एंड सेक्युरिटी विंग को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। ये आंध्र प्रदेश पुलिस के अंदर ही काम करने वाली एक डेडिकेटेड ब्रांच है, जिसके मुखिया IPS स्तर के अधिकारी होते हैं। इन्हें चीफ विजिलेंस एंड सेक्युरिटी ऑफिसर कहा जाता है। पारदर्शिता बनाए रखने और चोरी रोकने के लिए आधुनिक सुधारों में सिक्कों की गिनती करने वाली मशीनें, AI-आधारित निगरानी और सोने-चांदी के दान का हर महीने मूल्यांकन शामिल है। दान की गिनती करने वाले लोग भी बदन पर धोती के अलावा कुछ और नहीं पहन सकते हैं और जहां चढ़ावे को गिना जाता है वहां उसी स्टॉफ को जाने की अनुमति होती है, जिसे उस काम के लिए चुना गया है। यहां तक कि सिक्के की गिनती करने वाले वोलेंटियर्स की भी कम से कम तीन से चार बार फ्रिस्किंग होती है।
मशीनों ने गिने और पैक किए जाते हैं सिक्के
TTD के कर्मचारी और श्रीवारी सेवक (वॉलंटीयर) सिक्के, नोट और गहनों को अलग-अलग करते हैं। सिक्कों को मशीनों से गिना और पैक किया जाता है। करेंसी नोटों के बंडल बनाए जाते हैं और उनकी जांच की जाती है। सोने-चांदी की चीज़ों को सुरक्षित रखा जाता है और तिरुपति में TTD ट्रेजरी में भेजने से पहले हर महीने उनका मूल्यांकन किया जाता है। पराकमणि बिल्डिंग में हाई-रिज़ॉल्यूशन CCTV कैमरे लगे हैं, जो AI सिस्टम से जुड़े हैं ताकि हर स्टाफ़ की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके और चोरी को रोका जा सके। चढ़ावे की गिनती की निगरानी TTD के अधिकारी और पुलिसकर्मी हमेशा करते हैं। आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों की संख्या कम से कम रखी जाती है, ऐसे संवेदनशील कामों के लिए स्थायी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती है।