TMC टूटने की कगार पर? बागी विधानसभा पहुंचे, दावा- 59 विधायकों के साइन; स्पीकर को सौंप सकते हैं गुट बनाने का पत्र
Edited by : Pratik Sahu
पश्चिम बंगाल में बुधवार को राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी कथित तौर पर 59 विधायकों के हस्ताक्षर लेकर राज्य विधानसभा पहुंचे हैं। इस घटनाक्रम से तृणमूल कांग्रेस में टूट की आशंका बढ़ गई है।
बागी स्पीकर से मिलकर अलग गुट बनाने का दावा करेंगे पेश
जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आज बड़ी टूट की आशंका है। टीएमसी के दो बागी विधायक रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने खुद को असली टीएमसी विधायक घोषित करते हुए दावा किया है कि उनके पास 59 विधायकों के साइन हैं। ऋतब्रत को ममता बनर्जी ने अभी हाल में ही पार्टी से निकाला है। सूत्रों का दावा है कि रीताब्रत बनर्जी 59 विधायकों के साथ अलग गुट बना सकते हैं।
टीएमसी ने विधानसभा स्पीकर को लिखा खत
टीएमसी को भी पार्टी में टूट के खतरे का अहसास है। इसलिए टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने विधानसा स्पीकर को खत लिखकर शोभनदेव चट्टोपध्याय को नेता विपक्ष का मान्यता देने की मांग की है। इसके साथ ही टीएमसी ने विपक्ष के उप नेता के लिए आशिमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय को मुख्य सचेतक बनाने की मांग की है। अपने खत में कल्याण बनर्जी ने पिछली परंपराओं का जिक्र किया है। साथ ही उन्होंने स्पीकर का ध्यान इस तरफ दिलाया है कि जब वो 15 मई को विधानसभा स्पीकर चुने गए थे तो शोभनदेव नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्हें आसन तक ले गए थे। इसके बाद स्पीकर ने अपने भाषण में नेता विपक्ष के रूप में शोभनदेव का जिक्र किया है।
अलग पार्टी बनाने के लिए क्या है नियम?
बता दें कि अभी हाल में ही हुए चुनाव में टीएमसी को 80 विधायक चुने गए थे। इनमें से टीएमसी को टूटने के लिए 54 विधायकों की जरुरत है। इस हिसाब से अगर 59 विधायक अलग गुट बनाकर ममता बनर्जी से अलग हो जाते हैं तो इन पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा और इनकी विधायकी नहीं जाएगी। किसी भी पार्टी से टूटकर अलग पार्टी बनाने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए होता है।
