दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़, बंगाल से 3 गिरफ्तार
Edited by : Pratik Sahu

दिल्ली पुलिस ने ने डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड रैकेट का किया पर्दाफाश किया है। इस रैकेट के 3 आरोपियों को पुलिस ने बंगाल से गिरफ्तार किया है। एक महिला की शिकायत के बाद यह गैंग हत्थे चढ़ा है।
पुलिस ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई। ठगों ने महिला को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर रखा और झूठा दावा किया कि वह 'डिजिटल अरेस्ट' में है। महिला का आरोप है कि ठगों ने उससे 7.22 लाख रुपये की ठगी की है। पीड़ित महिला के मुताबिक,
आरोपियों ने कथित तौर पर उसे कानूनी कार्रवाई की धमकी दी और RTGS के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। शिकायत के बाद साइबर साउथ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
शिकायत के बाद साइबर साउथ थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि ठगी की गई रकम को सबसे पहले पश्चिम बंगाल के एक बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया था और उसके बाद उसे कई अन्य खातों में भेजा गया।
आगे की जांच से पता चला कि आरोपी कथित तौर पर ऐसे अपराधों को अंजाम देने के लिए साइबर धोखेबाजों को 'म्यूल' बैंक खाते (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते), सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराते थे। तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिलों में छापेमारी की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों की पहचान समीरन रॉय, प्रिंस शॉ और समर चटर्जी के रूप में हुई है।
पुलिस ने बताया कि उनके पास से छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 18 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़े कई दस्तावेज़ बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, आरोपी एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थे जो साइबर धोखाधड़ी से मिली रकम को ट्रांसफर करने और उसे कई खातों में इधर-उधर करने के(लेयरिंग) के लिए 'म्यूल' बैंक खातों का इंतजाम करते थे। शुरुआती जांच से अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट से भी संभावित संबंध होने का संकेत मिला है। पुलिस ने बताया कि इस पूरे मामले में आगे की जांच जारी है।