मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की सरकार को दिया झटका, करूर भगदड़ में मृतकों के परिवारों को नहीं मिलेगी 'दया के आधार पर नौकरी'
Edited by : Pratik Sahu

मद्रास हाई कोर्ट ने सीएम जोसेफ विजय की सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने करूर भगदड़ में मृतकों के परिवारों को 'दया के आधार पर नौकरी' देने के सरकारे के फैसले को रद्द कर दिया है।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन- कोर्ट
जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। बेंच ने कहा कि हर सरकारी विभाग में ऐसे कई लोग हैं जो दया के आधार पर नौकरी का इंतज़ार कर रहे हैं, और उनकी जरूरतों को नज़रअंदाज़ करके इस मामले में पीड़ित परिवारों को नौकरी देना सही नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि भले ही राज्य ने संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये आदेश जारी करने का दावा किया हो, लेकिन इन शक्तियों का इस्तेमाल संविधान के नियमों और सीमाओं के दायरे में ही किया जाना चाहिए था।
कई लोगों के लिए नौकरी मांगने का रास्ता खुलेगा- कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर इस मामले में दया के आधार पर नौकरी (compassionate appointment) की इजाजत दी जाती, तो इससे ऐसे ही और भी कई लोगों के लिए नौकरी मांगने का रास्ता खुल जाता। कोर्ट ने आतिशबाजी और मोटर दुर्घटनाओं के उदाहरण दिए, जिनमें भले ही जान का नुकसान सरकार की लापरवाही की वजह से हुआ हो, फिर भी पीड़ितों को दया के आधार पर नौकरी नहीं, बल्कि सिर्फ मुआवजा (ex-gratia payment) दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी नियुक्तियों की इजाजत दी जाती, तो सरकार को उन मामलों में भी नौकरी देनी पड़ती। आपको बता दें कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने जुलाई की शुरुआत में करूर के दौरा किया था और भगदड़ के हादसे में जान गंवाने वाले परिवारों में से 32 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी का लेटर भी दिया था।
41 लोगों की हुई थी मौत
दरअसल, तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर 2025 को भगदड़ मच गई थी। यहां थलापति विजय की पार्टी टीवीके की रैली हो रही थी। भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।