फिर टूटने के कगार पर शरद पवार की पार्टी! बचाने के लिए मोदी सरकार के इन दो बिलों के समर्थन में वोट करेगी NCP-SP
Edited by : Pratik Sahu

शरद पवार की पार्टी एक बार फिर टूटने के कगार पर खड़ी है। पार्टी के भीतर का एक धड़ा सरकार के साथ जाने की मांग कर रहा है। इस बीच, शरद पवार ने एनडीए को समर्थन की नीति अपनाई है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के पास कुल 8 लोकसभा सांसद हैं। इस वक्त शरद पवार की रणनीति NDA का हिस्सा ना बनते हुए एनडीए के समर्थन करने की है। दरअसल, शरद पवार गुट के भीतर एक धड़ा सरकार के साथ जाने की मांग कर रहा है। ऐसे में पार्टी को टूट से बचाने के लिए सिर्फ बिल को समर्थन देने की रणनीति अपनाई है।
डीलिमिटेशन बिल पर पवार की पार्टी का रुख
सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि डीलिमिटेशन संशोधन विधेयक में देश में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का फैसला होने पर शरद पवार की पार्टी बिल को समर्थन देगी। अमित शाह के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में शाह द्वारा इस प्रकार का प्रस्ताव लाने पर चर्चा हुई थी। इस चर्चा में सिर्फ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) पार्टी ने ही नहीं, बल्कि उद्धव बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना, कांग्रेस और डीएमके ने भी सहमति जताई है।इससे पहले, उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी में टूट देखने को मिली थी। अब शरद पवार की एनसीपी-एसपी में टूट की खबरें सुर्खियों में बनी हुई हैं। हाल ही में उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसद एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए थे। इसके बाद अब शरद पवार की पार्टी के विधायक और सांसद के भी पाला बदलने चर्चाएं हो रही हैं।
शरद पवार की पार्टी में कब-कब हुई टूट?
आपको बता दें कि महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता शरद पवार को अपने राजनीतिक सफर में कई बार उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में सबसे बड़ी टूट 2 जुलाई 2023 को हुई थी, जब उनके भतीजे अजित पवार ने बगावत कर दी थी। अजित पवार पार्टी के अधिकांश विधायकों को अपने साथ लेकर महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए थे। इस टूट के बाद चुनाव आयोग ने अजित पवार के गुट को ही असली NCP मान लिया और पार्टी का नाम व चुनाव चिह्न (घड़ी) उन्हें सौंप दिया। इसके बाद, शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को एक नई पहचान अपनानी पड़ी, जिसे अब NCP-SP यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार के नाम से जाना जाता है और उन्हें नया चुनाव चिह्न 'तुरहा बजाता हुआ व्यक्ति' मिला।
इससे पहले, नवंबर 2019 में भी अजित पवार ने ऐसी ही एक कोशिश की थी, जब उन्होंने अचानक सुबह-सुबह देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी। हालांकि, उस समय शरद पवार ने महज 80 घंटों के भीतर स्थिति को संभाल लिया और अजित पवार की बगावत को नाकाम करते हुए पार्टी को टूटने से बचा लिया था। और पीछे जाएं, तो खुद शरद पवार ने 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस से अलग होकर इस NCP पार्टी की स्थापना की थी। लेकिन 2023 की इस बड़ी टूट ने मूल NCP को दो हिस्सों में बांट दिया, जिससे आज शरद पवार की पार्टी बदलकर NCP-SP हो चुकी है। वहीं, इस साल जनवरी 2026 में अजित पवार की एक विमान हादसे में अचानक मौत हो गई थी।