जेल में हुई दोस्ती बनी करोड़ों की चोरी की प्लानिंग की वजह, रिटायर्ड PAC अधिकारी के घर 21 लाख की वारदात का खुलासा
Edited by : Pratik Sahu

कानपुर के हनुमंत विहार में रिटायर्ड पीएसी प्लाटून कमांडर के घर हुई 21 लाख रुपये की चोरी का पुलिस ने खुलासा करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है
दक्षिण कानपुर के हनुमंत विहार थाना क्षेत्र में हुई इस वारदात का खुलासा करते हुए डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पवन उर्फ रवि चौरसिया और राहुल कनौजिया के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ पहले से ही कई संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पवन पर चोरी और आर्म्स एक्ट समेत 9 मामले दर्ज हैं, जबकि राहुल के खिलाफ 16 आपराधिक केस दर्ज हैं।
घर से उड़ाए करीब 20 लाख के गहने
दरअसल, 24 जुलाई को बख्तौरीपुरवा निवासी और PAC से सेवानिवृत्त प्लाटून कमांडर फूल सिंह के घर चोरी हुई थी। घटना के समय परिवार के सदस्य घर के पीछे बने प्लॉट में बंधे पशुओं की देखभाल करने गए थे। कुछ देर बाद लौटे तो मुख्य दरवाजे का ताला टूटा मिला और घर के अंदर सारा सामान बिखरा पड़ा था। चोर अलमारी का लॉकर तोड़कर करीब 19.50 लाख रुपये के गहने और 1.20 लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए थे।
इस चोरी में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। वारदात के दौरान घर की दूसरी मंजिल पर सो रहा परिवार का एक नाती काफी देर तक नहीं जागा। परिजनों ने जब उसे उठाया तो वह बेसुध मिला। शुरुआती आशंका है कि चोरों ने बच्चे को कोई नशीला पदार्थ सुंघाया, ताकि वह जाग न सके और चोरी बिना किसी रुकावट के पूरी हो जाए। हालांकि, इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट और जांच के बाद ही होगी।
CCTV कैमरे से पुलिस को मिला अहम सुराग
पुलिस के लिए इस मामले में सबसे बड़ा सुराग घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरे बने। फुटेज में दोनों आरोपी तौलिया से चेहरा ढककर घर में घुसते दिखाई दिए। दिलचस्प बात यह रही कि भागते समय एक आरोपी अपनी तौलिया वहीं छोड़ गया। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तकनीकी साक्ष्य जुटाए और मुखबिर की सूचना के बाद दोनों आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी पहले भी नजीराबाद इलाके में करीब 90 लाख रुपये की चोरी के मामले में जेल जा चुके हैं। वहीं उनकी दोस्ती हुई थी। जेल से बाहर आने के लगभग चार महीने बाद दोनों ने फिर से चोरी की घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया। उनका तरीका तय था, पहले बंद मकानों की रेकी करना और फिर मौका मिलते ही घर में घुसकर लाखों का माल समेटकर फरार हो जाना।