तरुण तेजपाल को बड़ा झटका, दुष्कर्म मामले में दोषी करार; बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा

 Edited by : Pratik Sahu

tarun tejpal- India TV Hindi
तरुण तेजपाल


तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषी माना है। एक जाने-माने पत्रकार से जुड़े भारत के सबसे हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक में कई दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद, इस फैसले पर सबकी निगाहें टिकी थी।


तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल पर दुष्कर्म मामले में फैसला आ गया है। गोवा में बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने तरुण तेजपाल को दोषी माना है। कोर्ट ने कहा कि सजा के मुद्दे पर आज ही दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। साल 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को 2021 में बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सरकार की अपील पर जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया।

इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का यह फैसला त्रुटिपूर्ण था।

कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा, ''हमने ट्रायल कोर्ट के फैसले और आदेश को रद्द कर दिया है और तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया है। यदि आप आज ही सजा के बिंदु पर अपनी दलीलें रखें, तो हम उसे प्राथमिकता देंगे।''

आज सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: मैं अनुरोध कर सकता हूं कि सजा पर बहस दोपहर 2:30 बजे से शुरू की जाए?

वरिष्ठ अधिवक्ता पोंडा: मैं आज ही अपनी दलीलें शुरू करूंगा।

कोर्ट: तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी ठहराया जाता है।

कोर्ट: अब चूंकि सजा के मुद्दे पर दलीलें अभी होनी हैं, इसलिए तब तक तरुण तेजपाल को आत्मसमर्पण सरेंडर करने के लिए इंतजार करने को कहा जाता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने सजा के मुद्दे पर अपनी दलीलें शुरू करते हुए कहा कि- यह आरोपी का पहला अपराध है। वह 62 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक हैं। अदालत से अनुरोध है कि नरमी बरती जाए और भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत निर्धारित न्यूनतम सजा दी जाए। मुझे रिहाई से जुड़ी कानूनी सीमाओं की जानकारी है। फिलहाल जमानत दिए जाने की कोई गुंजाइश नहीं है। हालांकि, ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के परस्पर विरोधी फैसलों को देखते हुए मुझे सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।

तरुण तेजपाल के वकील ने कहा आरोपी द्वारा पहले बिताई गई छह महीने की हिरासत की अवधि को भी ध्यान में रखा जाए। उनके खिलाफ जेल में किसी प्रकार के दुर्व्यवहार या खराब आचरण की कोई शिकायत नहीं है।

अदालत: क्या तरुण तेजपाल सजा के मुद्दे पर अदालत को कुछ कहना चाहते हैं?

वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा: जी, वे अदालत में उपस्थित हैं।

अदालत: यदि वे अदालत को संबोधित करना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी अनुमति है। कोर्ट ने अपने फैसले पर तरुण तेजपाल को बोलने की अनुमति दी।

तरुण तेजपाल ने कहा: पिछले 30 सालों से हम तथ्य और सच सामने लाने का काम करते रहे हैं। जाहिर है, आज उसका कोई महत्व नहीं रह गया है। मैं दो बेटियों का पिता हूं और मेरा एक परिवार है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि अब हमारे पास उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प है...मेरे वकील ने मुझसे अदालत से सजा में नरमी की अपील करने को कहा है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: इस मामले में आरोपी ने किसी भी प्रकार का पछतावा नहीं दिखाया। उसने अगले ही दिन कथित कृत्य को फिर दोहराया। उसका रवैया बेहद निर्भीक था।

क्या है पूरा मामला? 

बता दें कि साल 2013 में तरुण तेजपाल के साथ काम करने वाली एक युवती ने उन पर गोवा के एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में रेप का आरोप लगाया था। 30 नवंबर 2013 को तरुण तेजपाल को अरेस्ट किया गया था। इससे पहले उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अपील भी की थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया था। गोवा सेशन कोर्ट ने साढ़े सात साल बाद 2021 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

वहीं, बता दें कि 6 महीने पहले एक अन्य मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिता के दावे को बेहद मनगढ़ंत बताया। एक फैसले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि बेटी गुस्से में पिता पर रेप का आरोप लगाए, यह कल्पना करना भी कठिन है।

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