महंगी चीनी से क्या जल्द मिलेगी राहत? ISMA ने कहा- देश में नहीं है कोई शॉर्टेज
Edited by : Pratik Sahu

चीनी की बढ़ती कीमतों ने जहां आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है वहीं, उद्योग संगठनों का कहना है कि घबराने जैसी स्थिति नहीं है। घरेलू स्टॉक, संभावित आयात और नई पेराई शुरू होने के बाद सप्लाई बढ़ने से आने वाले महीनों में चीनी की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि हाल में कीमतों में हुई बढ़ोतरी मुख्य रूप से जमाखोरी और मौसम से जुड़ी समस्याओं के कारण उत्पादन में कमी की वजह से हुई है। उन्होंने कहा कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए चीनी की सप्लाई की कोई बड़ी समस्या नहीं है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में बाजार में सप्लाई बेहतर होने के साथ चीनी की कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।
सरकार ने उठाया बड़ा कदम
चीनी के दाम बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने भी कदम उठाया है। सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसका मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है।
नवंबर से बढ़ सकती है सप्लाई
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (NFCSF) ने 2025-26 सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान 279 लाख टन रखा है। इसमें से करीब 24 लाख टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने का अनुमान है। अगले चीनी सीजन की शुरुआत 1 अक्टूबर से होगी। NFCSF के मुताबिक, उस समय करीब 35 लाख टन शुरुआती स्टॉक उपलब्ध हो सकता है। देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है। नवंबर में नई पेराई शुरू होने के बाद बाजार में एक्स्ट्रा सप्लाई आने की उम्मीद है।
ब्राजील से आ सकती है चीनी
NFCSF के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने कहा कि कुछ आयातित चीनी 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती है। फिलहाल ब्राजील आयात के लिए सबसे व्यावहारिक स्रोत माना जा रहा है। ब्राजील से चीनी को भारत पहुंचने में आमतौर पर 40-45 दिन लगते हैं।